
मैट्रिक इंटर की परीक्षाएं में विद्यार्थियों की मेहनत के कारण अपने माता-पिता सहित स्कूल और राज्य का नाम रोशन करते हैं ,
लेकिन कुछ ही बच्चे इस तरह के कारनामे दिखा पाते हैं इसका मुख्य जड़ की ओर यह इशारा करता है कि स्कूल में किस तरह से पढ़ाई किया जा रहा है स्कूलों में जो पढाने के लिए शिक्षक और शिक्षिकाएं होती हैं उनकी डिग्री पर्याप्त नहीं होता है , जिसके कारण बच्चों को पूर्ण रूप से शिक्षा नहीं मिलता है और जिसका परिणाम यह होता है कि जब परीक्षा का रिजल्ट निकलता है तो पिटारा बच्चों पर फोड़ दिया जाता है कि बच्चे मेहनत नहीं किए हैं ।
जब शिक्षक ही सही नहीं मिले तो बच्चे कैसे शिक्षा की गुणवत्ता लेकर मेहनत करेंगे।
शिक्षा विभाग और उनके संबंधित मंत्री से जरूर कहना चाहते हैं कि इन झारखंड सरकार के अधीन स्कूल व कॉलेज चलाए जा रहे हैं उनमें पढाने वाले शिक्षक शिक्षिकाओं का डिग्री प्राप्त है या नहीं ये जांच करने की जरूरत है ,और तभी झारखंड एक शिक्षित विकसित राज्य बनाया जा सकेगा ।





